प्रगति सभी को अच्छी लगती है। प्रगति अपने साथ समृद्धि लाती है। सम्मान लाती है, पर साथ ही मेहनत भी खूब माँगती है। कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें सफलता प्राप्त करने का जुनून सवार रहता है और यह जुनून सफलता प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है। फिर भले ही व्यक्ति को सत्य और ईमानदारी का दामन ही क्यों न छोड़ना पड़े। एक बुजुर्ग राजा की कहानी है, जिसे यह चिंता सताती रहती है कि उसके बाद उसके राज्य का क्या होगा? क्योंकि उसे अपने पुत्रों पर भरोसा नहीं है। ऐसे में वह अपने बाद कौन होगा राजा? इसकी खोज के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन करता है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वह राज्य के युवाओं को आमंत्रित करता है। कई युवा लड़के इसमें भाग लेते हैं और अपनी किस्मत आजमाने के लिए राज महल में आ जाते हैं। राजा सभी को संबोधित करते हैं कि वे एक प्रतियोगिता का आयोजन करने जा रहे हैं, जिसके माध्यम से वे अगले राजा की खोज कर पाएँगे। वे सभी को पौधे का बीज देते हैं और साथ में प्रतियोगिता के नियम बताते हैं कि अगले वर्ष इसी दिन वे सभी से मिलेंगे, जो इस बीज को अच्छा खाद पानी देकर गमले में बड़ा करेगा और जिसका पौधा सबसे स्वस्थ्य व सुंदर दिखेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मिहिर नामक एक लड़का भी गया था और वह भी बीज लेकर अपने घर आ गया। उसकी माँ ने उसकी मदद की और दोनों ने मिलकर गमले में मिट्टी डाली और बीज डालकर पानी डाला और इंतजार करने लगे कि कब छोटा-सा पौधा नजर आए। मिहिर के दोस्तों ने भी इसमें भाग लिया था और सभी अपनी ओर से इस प्रयास में लगे थे कि जल्द से जल्द पौधा नजर आ जाए और वे उसे खाद देकर और भी बड़ा करें।
NDएक सप्ताह बाद भी मिहिर के गमले में पौधा नजर नहीं आया। लगभग एक महीने बाद मिहिर को चिंता होने लगी कि अब तक पौधा नजर क्यों नहीं आ रहा है, वहीं मिहिर के दोस्त रोजाना अपने पौधे के विकास के बारे में बताते रहते थे। सभी के गमलों में पौधे आ गए थे। ऐसा करते हुए 6 महीने बीत गए, पर मिहिर के गमलें में कुछ भी नहीं नजर आया। अलबत्ता वह रोजाना पानी डालता था। उसकी माँ ने उसे समझाया कि बेटा धीरज रख, हो सकता है अगले कुछ दिनों में पौधा नजर आ जाए। ऐसा करते हुए एक वर्ष बीत गया और राजा ने सभी युवाओं को अपने महल में आने का संदेशा भिजवाया। मिहिर जाने को तैयार नहीं था, क्योंकि वह खाली गमला लेकर नहीं जाना चाहता था। उसकी माँ ने उसे समझाया कि बेटा तुमने प्रयास किया है और वह भी ईमानदारी के साथ, फिर लज्जित होने की क्या बात है? मिहिर ने माँ की बात सुनकर महल में जाने का निश्चित किया। महल में वह क्या देखता है कि उसके दोस्त व अन्य युवा एक से बढ़कर एक पौधे लाए थे। किसी में रंग-बिरंगे फूल थे तो किसी के पत्ते ही काफी आकर्षित कर रहे थे। कोई मिहिर को चिढ़ा रहा था तो कोई कह रहा था कि किस्मत तुम्हारे साथ नहीं। राजा ने मंच से देखना आरंभ किया और उसकी नजर मिहिर पर पड़ी। उसने सैनिकों को उसे आगे लाने के लिए कहा। मिहिर डर गया। उसे लगा कि राजा उसे अब मार ही देगा। मिहिर जैसे ही राजा के पास पहुँचा उसने कहा कि मैंने अपनी तरफ से मेहनत की और रोजाना पानी डाला था, पर ... इस पर राजा बोला राज्य का अगला राजा मिहिर होगा। दरअसल राजा ने सभी को मरे हुए बीज दिए थे, जिसमें कभी भी पौधे आ ही नहीं सकते थे। पर, सफलता प्राप्त करने के लिए युवाओं ने झूठ का सहारा लिया और अपनी ओर से बीज डाल दिए थे। दोस्तो सत्य और ईमानदारी का रास्ता लंबा जरूर है, पर इसमें सुकून भरी सफलता भी है।
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